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वाल्ज़र : उदारवाद की समुदायवादी समालोचना

(माइकल वाल्ज़र के विचारों को अभिव्यक्त करने वाला यह लेख स्वयं वाल्ज़र द्वारा लिखित है. यह लेख पूरी समुदायवादी परम्परा को व्यक्त करता है. वाल्जर द्वारा स्वयं इस लेख को…

रॉबर्ट नॉज़िक : अराजकता, राज्य व स्वप्नलोक

इस लेख में नॉज़िक की चर्चित पुस्तक ‘एनार्की, स्टेट एण्ड यूटोपिया’ पर तीन विद्वानों द्वारा परिचर्चा की गई है – सम्पादक (प्रथम खण्ड : जेम्स कोलमैन) जेम्ल कोलमैन, बोरिस फ्रैंकल,…

राज्य, नागरिक – समाज एवं लोकतंत्र

सत्य प्रकाश दास : वर्तमान सन्दर्भ में जनमानस द्वारा नागरिक समाज की अवधारणा को एक लोकतान्त्रिक सरकार के कुशल संचालन एवं क्रियान्वयन के लिये व्यापक एवं तीव्रतम गति से आत्मसात किया…

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियां

सुधा पई : उत्तर प्रदेश की विडम्बना यह है कि यह अन्य राज्यों की अपेक्षा अत्यन्त पिछड़ा एवं अविकसित राज्य है. भारत के अन्य राज्यों की तुलना में इसका साक्षरता प्रतिशत…

पूर्व-आधुनिक भारत में मन्दिरों का अपवित्रीकरण

रिचर्ड एम. ईटन : इस निबन्ध का उद्देश्य इस बात की जांच करना है कि भारत के पूर्व-आधुनिक इतिहास में किन-किन मन्दिरों का अपवित्रीकरण हुआ था, कब और किसके द्वारा हुआ…

राष्ट्र : गवेषणात्मक दृष्टि

शिव विश्वनाथन : राष्ट्रीयता एवम् नस्लवाद जैसी अवधारणाएं अरुचिकर लग सकती हैं. इतिहास की पुस्तकों में राष्ट्र की अवधारणा समाज की चेतना में गहरे पैठे हुए किसी विचार-सा लगता है जिससे…

भारत में राजनीति विज्ञान

घनश्याम शाह : राजनीति विज्ञान मात्र एक विषय या अनुशासन ही नहीं वरन् एक बौद्धि प्रवृत्ति भी है जो एक विषय की सीमाओं से वृहत्तर अध्ययन करती है. इसमें ऐसे बीज…